SSSNB — Shree Shyam Sudhama Nishan Bhandar

खाटू श्याम जी — इतिहास, महत्व और निशान परंपरा

॥ जय श्री श्याम ॥

खाटू श्याम जी कौन हैं?

खाटू श्याम जी को कलियुग में बर्बरीक के अवतार के रूप में पूजा जाता है, जो महाभारत में भीम के पौत्र थे। भगवान कृष्ण के आशीर्वाद से बर्बरीक ने युद्ध से पहले अपना शीश दान कर दिया, और कृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में उन्हें कृष्ण के ही नाम 'श्याम' से पूजा जाएगा।

उन्हें प्रेम से 'हारे का सहारा' और 'तीन बाण धारी' कहा जाता है। भक्त मानते हैं कि वे हर सच्ची पुकार सुनते हैं।

खाटू धाम मंदिर

मंदिर राजस्थान के सीकर ज़िले में रींगस के पास खाटू में स्थित है — हमारा घर। यहाँ बर्बरीक का स्वयं प्रकट शीश विराजमान है; वर्तमान मंदिर सदियों से भक्तों द्वारा संवारा और पुनर्निर्मित किया गया है।

फाल्गुन मेला

सबसे बड़ा आयोजन फाल्गुन मेला है, जो फाल्गुन माह (फरवरी–मार्च) के शुक्ल पक्ष में होता है। लाखों भक्त निशान लेकर, भजन गाते हुए खाटू पैदल पहुँचते हैं। तिथियाँ हर वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार होती हैं।

निशान — पवित्र ध्वज

मंदिर तक निशान (डंडे पर त्रिकोणीय ध्वज) ले जाना श्याम भक्त की सबसे प्रिय भेंट है। यह पूर्ण की गई मन्नत है, कंधे पर उठाई गई प्रार्थना। निशान कई आकारों में आते हैं — बच्चों के लिए हाथ वाले, से लेकर समूहों और दुकानों के लिए ऊँचे डंडे तक।

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